जब घर में बेटी का जन्म होता है, तो खुशियों के साथ-साथ कई जिम्मेदारियां भी आ जाती हैं। खासतौर पर छोटे वर्ग के परिवारों में मां और नवजात बच्ची की देखभाल को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी बात को समझते हुए उत्तराखंड राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना 2025 की शुरुआत की है। इस योजना के जरिए गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के बाद जरूरी चीज़ों से भरी एक खास किट दी जाती है, जिससे मां और नवजात बालिका की शुरुआती देखभाल आसान हो सके।
आपको बता दें कि इस आर्टिकल में आपको महालक्ष्मी किट योजना से जुड़ी हर जरूरी जानकारी मिलने वाली है। इसमें योजना का उद्देश्य, पात्रता, आय सीमा, मिलने वाले फ़ायदे, जरूरी दस्तावेज और आवेदन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को सीधा और आसान भाषा में समझाया गया है। अगर आप इस योजना का पूरा फ़ायदा लेना चाहती हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
उत्तराखंड मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना 2025 क्या है?
मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुरू किया गया है। इस योजना के तहत उत्तराखंड की गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के बाद एक महालक्ष्मी किट दी जाती है। यह किट खासतौर पर नवजात बालिकाओं और उनकी माताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार लाना और परिवारों को आर्थिक रूप से थोड़ी मदद देना है।
योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य साफ है, कि कोई भी मां और नवजात बच्ची जरूरी चीज़ों की कमी के कारण परेशानी का सामना न करें। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं संस्थागत प्रसव करवाएं, जिससे मां और बच्ची दोनों सुरक्षित रहें और उनकी सेहत अच्छी बनी रहे।
महालक्ष्मी किट योजना के फ़ायदे
इस योजना के तहत मिलने वाली किट काफी उपयोगी होती है और रोजमर्रा की ज़िंदगी में काम आती है।
- महिला को अपनी पहली दो बालिकाओं के जन्म पर अलग-अलग महालक्ष्मी किट दी जाती है।
- अगर जुड़वा बच्चियां जन्म लेती हैं, तो प्रत्येक बालिका के लिए अलग किट मिलती है।
- तीसरी बेटी के जन्म पर इस योजना का फ़ायदा नहीं दिया जाता, यह बात ध्यान में रखना जरूरी है।
- मां की किट में सूखे मेवे, मोजे, स्कार्फ, तौलिया, शॉल, कंबल, चादर, सेनेटरी पैड, सरसों का तेल, साबुन और नाखून काटने की मशीन होती है।
- नवजात बालिका की किट में गर्म टोपी, मोजे, डायपर, तौलिया, शिशु साबुन, रबर शीट, गर्म कंबल और टीकाकरण कार्ड शामिल होता है।
पात्रता और आय सीमा से जुड़ी जरूरी शर्तें
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करना जरूरी है।
- लाभार्थी महिला उत्तराखंड की स्थायी निवासी होनी चाहिए।
- महिला गर्भवती हो और आंगनवाड़ी केंद्र में पंजीकृत हो।
- परिवार की वार्षिक आमदनी 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
- महिला आयकर दाता नहीं होनी चाहिए।
- संस्थागत प्रसव के बाद ही किट दी जाती है।
जरूरी दस्तावेज कौन-कौन से लगेंगे?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की जरूरत होती है।
- लाभार्थी महिला का पहचान पत्र
- ममता कार्ड (Mother and Child Protection Card)
- डिलीवरी से जुड़ी बीमारी रिपोर्ट या अस्पताल की छुट्टी से जुड़े कागज़
- अगर आंगनवाड़ी केंद्र मांगे तो अन्य दस्तावेज
आवेदन की प्रक्रिया और समय सीमा
आपको बता दें कि इस योजना के लिए अलग से ऑनलाइन आवेदन नहीं करना होता। अगर गर्भवती महिला आंगनवाड़ी केंद्र में पहले से पंजीकृत है, तो संस्थागत प्रसव के बाद उसे यह किट दी जाती है। ध्यान रखने वाली जरूरी बात यह है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के 15 दिनों के भीतर ही संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र में जानकारी देना जरूरी होता है, तभी किट मिल पाती है।
योजना से जुड़ी जरूरी जानकारी कहां मिलेगी?
महालक्ष्मी किट योजना से जुड़ी ताजा अपडेट और नियमों की जानकारी महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की योजना की ऑफिशियल वेबसाइट पर आमतौर पर प्रोवाइड की जाती है।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना 2025 बेटियों के जन्म को बढ़ावा देने और मां-बच्ची की सेहत सुधारने की दिशा में एक अच्छा कदम है। अगर आप पात्र हैं और सभी शर्तें पूरी करती हैं, तो इस योजना का फ़ायदा जरूर उठाएं और अपने परिवार की आर्थिक बचत में मदद पाएं।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी हेतु लिखा गया है। किसी भी योजना में आवेदन करने से पहले योजना की ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी जरूर पढ़ें।
